
लखनऊ : 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को विधायी एवं नीतिगत संरक्षण प्रदान किए जाने के संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब लखनऊ में प्रेस वार्ता कर आंदोलन कार्यक्रम घोषित किया है।
प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर संजय मेधावी ने बताया कि टीईटी लागू होने से पूर्व सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु 18 जून 2026 को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश के सभी जिला केंदों पर विशाल प्रदर्शन कर जिला अधिकारियों के माध्यम से भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजगा।
प्रदेश महामंत्री जोगेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि संगठन द्वारा संसद के मानसून सत्र से पहले देश के सभी राज्य सभा एवम् लोकसभा सांसदों से भेंटकर उन्हें ज्ञापन सौंपकर संसद में विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान कर शिक्षकों को स्थाई राहत प्रदान करने का आग्रह किया जाएगा।
विदित हो कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश,अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ( ABRSM) से संबद्ध शिक्षक संगठन है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश के 14 लाख से अधिक शिक्षक सदस्य बाला अखिल भारतीय शिक्षक संगठन है जो अपने स्थापना काल से अद्यतन शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, शैक्षिक उन्नयन व राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए कर्मशील है।
प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय प्रभावी नियमों एवं पात्रताओं के अनुरूप पूर्णतः वैध थीं। बाद में निर्धारित पात्रता अथवा योग्यता मानदण्डों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता एवं योगदान को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह ने कहा कि लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता एवं शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा। संसद एवं केंद्र सरकार आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत हस्तक्षेप कर देश के लाखों शिक्षकों को उचित संरक्षण प्रदान कर सकती है। किसी भी पात्रता मानदण्ड को पूर्व प्रभाव से लागू करने के प्रश्न पर न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के आलोक में पुनर्विचार अपेक्षित है। टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपने का निर्णय नैसर्गिक न्याय एवम् नियुक्ति व सेवा नियमावली के विपरीत है।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप कुमार तिवारी ने कहा कि लाखों शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश प्रबल विरोध करेगा एवम् किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने देगा। उत्तरप्रदेश के 75 जिलों के सभी ब्लॉक व न्याय पंचायत स्तर तक के राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी, सदस्य एवं समर्थक शिक्षक 18 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के सभी जिला केंद्रों पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित विशाल प्रदर्शन में शामिल होकर जिलाधिकारियों के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री एवम् केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों के साथ न्यायसंगत व्यवस्था लागू करने की मांग करेंगे।
प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर संजय मेधावी , प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह, प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह, प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप कुमार तिवारी, प्रदेश कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ल, प्रदेश मंत्री डॉ श्वेता, लखनऊ मण्डल अध्यक्ष महेश मिश्रा, लखनऊ जिलाध्यक्ष अनुराग राठौर, जिला संगठन मंत्री आशीष मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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