"संगठन में व्यक्ति नहीं विचार प्रमुख है, जिसका पालन एवं प्रसार प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व" : महेंद्र कुमार जी, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,ABRSM
कानपुर। पारितोष इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय ( 4 व 5 अप्रैल 2026)अभ्यास वर्ग का आयोजन किया गया जिसमें अवध व कानपुर प्रांत के 29 जिलों से 326 शिक्षक शिक्षाविदों ने प्रतिभाग कर शैक्षिक उन्नयन, सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने,गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त रखने एवं हमारा विद्यालय- हमारा तीर्थ का संकल्प लिया।
प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि उदघाटन समारोह में बोलते हुए बीजेपी बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और दर्शन से बच्चों को परिचित कराना शिक्षकों का प्रमुख दायित्व है एवम् राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इस दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। नई शिक्षा नीति का समूचा ढांचा भारतीय जीवन मूल्यों एवम् संस्कारों के परिप्रेक्ष्य में तैयार किया गया है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन की समस्त जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इसमें निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अरविन्द दीक्षित जी ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की संगठन यात्रा पर बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश एक मात्र ऐसा संगठन है जो शिक्षक समस्याओं के समाधान के साथ साथ शैक्षिक उन्नयन एवं राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का सराहनीय कार्य कर रहा है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार जी ने वैचारिक अधिष्ठान, कार्यपद्धति एवं कार्यकर्ता विकास पर अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन के वैचारिक अधिष्ठान एवम् कार्यपद्धति के विचार को प्रत्येक शिक्षक तक पहुंचाना प्रत्येक पदाधिकारी का दायित्व है। जिले के शीर्ष पदाधिकारी अपने जिले के कार्यकर्ताओं की प्रतिभाओं को परखें और उन्हें उस दिशा में आगे बढ़ाएं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ शिक्षकों की समस्याओं के समाधान एवम् गुरु शिष्य पुरातन परम्परा की पुनर्स्थापना, भारतीय ज्ञान परंपरा की अवधारणा को शिक्षा में लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रहा है।
प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि अपने विद्यालयों को तीर्थ के रूप में विकसित करें।प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ परिवार के सदस्य है। शिक्षकों की समस्या हमारी व्यक्तिगत समस्या है शैक्षिक समस्याओं के समाधान एवम् शिक्षकों के मान सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की धारा 21 बहाल करने, स्व वित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली बनाने आदि पर निर्णायक संघर्ष करने की बात कही।
समापन सत्र में कानपुर प्रांत के प्रांत प्रचारक श्री राम जी ने शिक्षकों के गौरवमय अतीत एवं राष्ट्रीय पुनर्निर्माण में उनके योगदान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सौ वर्ष की गौरवमय यात्रा, पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन पर विस्तार से चर्चा करते हुए विद्यालयों को तीर्थ के रूप में विकसित करने का आवाहन किया उन्होंने का की राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े शिक्षक विभिन्न जिलों में अपने विद्यालयों को हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ के रूप में विकसित करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम को प्रदेश महामंत्री (प्राथमिक) प्रदीप कुमार तिवारी, डॉ. संतोष शुक्ला (माध्यमिक), और प्रदेश कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला सहित अन्य प्रमुख शिक्षाविदों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव सहित सैकड़ों शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।







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