- राष्ट्रीय शैक्षिक महांसघ ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा
- संसद में आरटीई अधिनियम में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान करने की माँग
लखनऊ : 18 जून 2026
आरटीई एक्ट लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी थोपने के विरोध में पूरे भारत में शिक्षकों में भारी आक्रोश है। इसके विरोध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आवाहन पर पूरे भारत एवं उत्तर प्रदेश के समस्त जिला केंद्रों पर हजारों शिक्षकों ने व्यापक प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपे।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष संजय मेधावी ने कहा कि देशभर के लगभग 14 लाख शिक्षकों में वर्तमान समय में गहरी चिंता, पीड़ा एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त है। इसका कारण 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी टीईटी संबंधी अधिसूचना एवं केंद्र सरकार द्वारा आरटीई एक्ट के सेक्शन 23(2) में दिनांक 9 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन तथा उसके संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 1 सितंबर 2025 एवं पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियाँ हैं, जिनके कारण वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा तथा आजीविका पर संकट आ पड़ा है।
प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का यह स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम, अधिसूचना अथवा नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों तथा अर्जित सेवा-अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदण्डों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता तथा विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता है।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि इन शिक्षकों ने वर्षों से राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक चेतना एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जनहित में संसद एवं केंद्र सरकार को आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत हस्तक्षेप कर शिक्षकों को तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कहा कि देश के शिक्षक समुदाय को विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार संवेदनशीलता, दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. उदयन मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. कमल कौशिक, कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला, मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव, मंत्री डॉ श्वेता, संयुक्त मंत्री सोनल शर्मा, रविन्द्र पंवार, प्रियंका शुक्ला, सह मीडिया प्रभारी संजय शर्मा, डॉ बजरंग बहादुर सिंह, रुचि अरोरा के अलावा समस्त जिला, ब्लॉक व नगर इकाइयों के पदाधिकारी व सदस्यों सहित हजारों शिक्षक मौजूद रहे।

0 टिप्पणियाँ
शिकायत या सुझाव के लिये 9793252280 पर कॉल या मैसेज करें